NEET UG 2025 का एग्जाम तो हो गया है, लेकिन अब रिजल्ट को लेकर लाखों स्टूडेंट्स की टेंशन बनी हुई है। हर कोई यही पूछ रहा है – “NEET का रिजल्ट कब आएगा?” रिजल्ट तो तैयार है, लेकिन अभी तक जारी नहीं किया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है – MP हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई। आइए इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।
रिजल्ट जारी न होने का कारण क्या है?
NEET UG 2025 का रिजल्ट नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से पूरी तरह तैयार है। बस अब आधिकारिक तौर पर जारी करने का बटन दबाना बाकी है। लेकिन मामला फंस गया है एक परीक्षा केंद्र पर हुई गड़बड़ी की वजह से।
बिजली गुल होने की वजह से क्या हुआ?
4 मई 2025 को जब परीक्षा हो रही थी, इंदौर जिले के एक परीक्षा केंद्र पर अचानक बिजली चली गई थी। इस वजह से उस केंद्र के छात्रों को पेपर ठीक से देने का मौका नहीं मिल पाया।
हाईकोर्ट में मामला कैसे आया?
परीक्षा खत्म होते ही उस केंद्र के कुछ उम्मीदवारों ने MP हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि उनके साथ अन्याय हुआ है, इसलिए उन्हें दूसरा मौका दिया जाए या रिजल्ट जारी न किया जाए।
कोर्ट ने क्या निर्णय लिया?
MP हाईकोर्ट ने सबसे पहले पूरे NEET UG 2025 रिजल्ट पर अस्थायी रोक लगा दी। इससे पूरे देश के लाखों स्टूडेंट्स का रिजल्ट रुक गया। बाद में कोर्ट ने कहा कि केवल इंदौर के उस एक सेंटर का रिजल्ट रोका जाए और बाकी देश के छात्रों का रिजल्ट घोषित किया जाए। पर फिर कुछ और उम्मीदवारों ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिससे पूरा रिजल्ट दोबारा रोक दिया गया।
आगे क्या हो सकता है?
अब मामला कोर्ट में फिर से विचाराधीन है। उम्मीद है कि जल्द ही कोई फाइनल फैसला आएगा और NTA रिजल्ट जारी कर पाएगी। NTA की तरफ से भी कहा गया है कि रिजल्ट पूरी तरह तैयार है, बस कोर्ट की अनुमति मिलनी बाकी है।
स्टूडेंट्स को इस वक्त क्या करना चाहिए?
इस वक्त सबसे जरूरी है कि स्टूडेंट्स घबराएं नहीं। कोर्ट का फैसला जल्द आने की उम्मीद है। इस बीच स्टूडेंट्स को चाहिए कि वे अपना एडमिट कार्ड और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स संभाल कर रखें, आधिकारिक वेबसाइट ntaresults.nic.in और neet.nta.nic.in पर नज़र बनाए रखें, और किसी अफवाह या फर्जी वेबसाइट पर भरोसा न करें।
क्या रिजल्ट दो हिस्सों में आ सकता है?
टेक्निकली, हां। अगर कोर्ट अनुमति दे देता है, तो इंदौर के विवादित सेंटर को छोड़कर बाकी सभी छात्रों का रिजल्ट पहले जारी किया जा सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह हाई कोर्ट की सुनवाई और फैसले पर निर्भर करता है।


